तुम एक महकता गुलाब हो…
आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो अपमान हो, तिरस्कार हो,ताने की बौछार हो बात-बात पर अपने मुकर जाए, बदल जाए सीधा चलने पर भी लोग उलट वार करें तो मान लो कि तुम एक बहता सैलाब हो l आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो हर घड़ी हर पल स्वयं की परीक्षा देनी पड़े दमबदम अपने वज़ूद का सबूत देना पड़े कदम कदम पर सवाल पूछना पड़े तो मान लो कि तुम एक माकूल जवाब होl आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो काबिलियत का लोहा दुनिया ने मानी हो अपनी किस्मत की कहानी खुद लिखी हो संघर्षों के अक्षर से संकल्प सिद्धि पढ़ी हो तो मान लो कि तुम इंकलाबी किताब हो l आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो कट जाए भले लेकिन झुकना नहीं जानते भटक जाए पर वापस मुड़ना नहीं जानते जीत मिले ना मिले मगर हारना नहीं जानते तो मान लो कि तुम एक शाही नवाब होl आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो तुम्हारा नजरिया जब तुम्हें खूबसूरत बनाएं तुम्हारे हुनर को नजाकत से निहारा जाए लाख चाहने पर भी कोई तुम्हें छू ना पाए तो मान लो कि तुम एक हसीन ख्वाब हो आसपास जब तुम्हारे चुभते कांटे हो तो मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो चतुर्दिक् विषाद के बीच…
