तुम एक महकता गुलाब हो…

आसपास जब तुम्हारे  चुभते  कांटे  हो  तो  मान लो  कि तुम एक महकता गुलाब हो अपमान हो, तिरस्कार हो,ताने की बौछार हो  बात-बात पर अपने मुकर जाए, बदल जाए  सीधा चलने पर भी लोग उलट  वार करें तो  मान लो कि तुम एक  बहता सैलाब हो l आसपास जब तुम्हारे चुभते  कांटे हो तो  मान लो कि तुम एक महकता गुलाब हो  हर घड़ी हर पल स्वयं की परीक्षा देनी पड़े  दमबदम अपने वज़ूद का सबूत देना पड़े  कदम कदम पर सवाल पूछना पड़े तो   मान लो  कि तुम एक माकूल जवाब होl  आसपास जब तुम्हारे  चुभते  कांटे  हो  तो  मान लो  कि तुम एक महकता गुलाब हो काबिलियत का लोहा दुनिया ने मानी हो  अपनी किस्मत की कहानी खुद लिखी हो  संघर्षों के अक्षर से संकल्प सिद्धि पढ़ी हो  तो मान लो कि तुम इंकलाबी किताब हो l  आसपास जब तुम्हारे  चुभते  कांटे  हो  तो  मान लो  कि तुम एक महकता गुलाब हो  कट जाए भले लेकिन झुकना नहीं जानते  भटक जाए पर वापस मुड़ना नहीं जानते  जीत मिले ना मिले मगर हारना नहीं जानते  तो मान लो कि तुम एक शाही नवाब होl  आसपास जब तुम्हारे  चुभते  कांटे  हो  तो  मान लो  कि तुम एक महकता गुलाब हो तुम्हारा नजरिया जब तुम्हें खूबसूरत बनाएं  तुम्हारे हुनर को नजाकत से निहारा जाए  लाख चाहने पर भी कोई तुम्हें छू ना पाए  तो मान लो  कि  तुम एक हसीन  ख्वाब हो  आसपास जब तुम्हारे  चुभते  कांटे  हो  तो  मान लो  कि तुम एक महकता गुलाब हो  चतुर्दिक्  विषाद के बीच…

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Rain… A Sketch Poem

From the wet edge of her saree (Panata), A stream of maternal love was dripping. Yet, to put food into the mouth of her ailing child, The nectar-stream of her breasts had completely run dry. The portion of the thatched roof That had blown away during the Kala Baisakhi (summer storm) Could not be repaired or put back together; The promised relief and assistance from the administration Has not reached her to this day. The man who had left with a middleman (Dalal) In search of better earnings never returned. And the thirteen-year-old daughter, Who was called away to the village chief's (Sarpanch) house On the pretext of being given a plastic tarpaulin sheet— Has not come back home since. From within the mud walls that were collapsing in the rain, The exposed wooden rafters looked utterly helpless. Carrying a heart that had already shattered in the prime of her youth, She was wrapping her wet clothes tightly to cover her body. She was reminded of the childhood nursery rhyme: "The clouds rain down, pitter-patter, The water-chestnuts have sprouted, In which distant kingdom does my king reside? Go, play the drums of his arrival..." Nothing felt comforting to her here anymore. Streams of tears were rolling down her eyes, While outside, a torrent of rain kept pouring down. Amidst the roar of thunder and flashes of lightning, Vanishng into the deep darkness of the night Was the helpless, desperate cry of a virgin girl Who had just stepped out to…

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बारिश… एक स्केच कविता

उसकी भीगी हुई आँचल (पड़त) से ममत्व (वात्सल्य) का झरना झर रहा था। पर अपने बीमार बच्चे के मुँह में निवाला देने के लिए, उसके स्तनों से दूध (अमृत) की धार सूख चुकी थी। 'काल बैसाखी' के तूफ़ान में उड़ गया जो छप्पर का एक हिस्सा, वह आज तक सुधारा नहीं जा सका; प्रशासन की ओर से मिलने वाली सहायता का वादा आज तक सिर्फ़ एक वादा ही बनकर रह गया है। ज़्यादा कमाने की आस में दलाल के साथ गया वह आदमी फिर कभी वापस नहीं लौटा। और वह तेरह साल की मासूम बेटी, जिसे सरपंच ने अपने घर यह कहकर बुलाया था कि वह उसे ओढ़ने के लिए एक पॉलिथीन की त्रिपाल देगा— वह बेटी उस दिन के बाद से आज तक घर नहीं आई। बारिश में ढहती हुई उस मिट्टी की दीवारों के भीतर से, छत की वे नंगी लकड़ियाँ (बल्लियाँ) बेहद बेबस दिख रही थीं। भरे यौवन में पूरी तरह टूट चुके एक मन को समेटे, वह अपने उन भीगे कपड़ों में ही किसी तरह बदन को ढँक रही थी। उसे रह-रहकर बचपन का वह गीत याद आ रहा था: "मेघ बरसे टुपूर-टापूर, केसूर (सिंघाड़े) में फूटे अंकुर, किस परदेस में रह गए मेरे राजा, जाओ, बजाओ ढोल और बाजा..." यहाँ अब उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। आँखों से लगातार आँसुओं की धार बह रही थी, और बाहर बादलों से बारिश की झड़ी लगी थी। बिजली की कड़क और बादलों की गड़गड़ाहट के बीच, रात के उस स्याह अँधेरे में विलीन हो रही…

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